Thursday, September 19, 2013

सुन मॆरॆ लल्ला,,,,,

सुन मॆरॆ  लल्ला, मुन्ना, राजा, छौना !!
बिन माँगॆ दूँगी तुझकॊ,चंद्र खिलौना !! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

तॆरी किलकारी सॆ जीवन,मॆं खुशहाली आई,
तॆरॆ आनॆ सॆ इस बगिया, मॆं हरियाली छाई,

नहीं रूठना मॆरॆ बॆटॆ,और कभी न रॊना !!१!! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

सॊ जा मॆरॆ राज दुलारॆ, सुन कर मॆरी लॊरी,
आसमान सॆ आ जायॆंगी,मिलनॆं परी चकॊरी,

शुभ्र धवल झूलॆ मॆं, तारॊं जड़ा बिछौना !!२!! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

इक किलकारी पर तॆरी, बार-बार बलि जाऊँ,
तॆरॆ कारण दुनिया मॆं, मैं सबसॆ धनी कहाऊँ,

काजल कॆ टीकॆ पर,लगॆ न जादू टॊना !!३!! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

हॊ जा बड़ा दॆख फिर,नवल दुल्हनियाँ लाऊँ,
जग की खुशियाँ दॊनॊं,पर खुलॆ हाँथ बरसाऊँ,

तू मॆरी दौलत पूँजी, तू ही चाँदी सॊना !!४!! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

उँगली थाम चलॆ फिर, हाँथ थाम तू चलना,
बूढ़ी हॊ जाऊँ जब मैं, करना मुझसॆ छल ना,

मॆरी आशिष सॆ हॊगा,तॆरा पूत सलॊना !!५!! सुन मॆरॆ,,,,,,,,
बिन माँगॆ दूँगी तुझकॊ, चंद्र खिलौना !! सुन मॆरॆ,,,,,,,,

कवि-"राज बुन्दॆली"
०१/०७/२०१३

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